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रविवार, 3 अगस्त 2014

किस स्थान पर हनुमानजी की फोटो नहीं लगानी चाहिए !!


आज के समय में हनुमानजी के भक्तों की संख्या काफी अधिक है, क्योंकि बजरंग बली श्रद्धालुओं की समस्याओं को बहुत ही जल्द दूर करते हैं। इसी वजह से लोग हनुमानजी की प्रतिमा या फोटो अपने घर में भी रखते हैं। हनुमानजी के साथ ही अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां या फोटो घर में हों तो कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।मूर्तियां चमत्कारी असर दिखाती हैं। इसी वजह से शास्त्रों में मूर्तियों और तस्वीरों के लिए कई महत्वपूर्ण नियम बताए गए हैं। क्या आप जानते हैं घर में कैसी मूर्तियां और तस्वीर नहीं रखना चाहिए?

पति-पत्नी बेडरूम में बाल गोपाल की या राधा-कृष्ण की प्रतिमा या फोटो रखेंगे तो बहुत शुभ रहता है। बेडरूम में राधा-कृष्ण का फोटो लगाने से पति-पत्नी के बीच परस्पर प्रेम बढ़ता है। जबकि अन्य देवी-देवताओं की मूर्ति बेडरूम में रखना नहीं चाहिए। विशेष रूप से हनुमानजी की फोटो बेडरूम में नहीं रखना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार हनुमानजी ब्रह्मचारी हैं और इसी वजह से उनका चित्र बेडरूम में नहीं बल्कि घर के मंदिर में या किसी अन्य पवित्र स्थान पर रखना शुभ रहता है।

घर में कभी भी टूटी-फूटी तस्वीर अथवा मूर्ति नहीं रखना चाहिए। अगर कोई मूर्ति या तस्वीर टूट जाए तो उसे तुरंत घर से हटा दें। मूर्तियों का खंडित होना अपशकुन माना जाता है। पूजा करते समय भक्त का पूरा ध्यान भगवान और उनके स्वरूप की ओर ही होता है। ऐसे में मूर्ति खंडित होगी तो भक्त का ध्यान भंग हो सकता है। ध्यान भंग होने पर पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं हो पाता है। इसी वजह से खंडित मूर्तियां घर में नहीं रखना चाहिए।


Courtesy- http://devotionalsongs.jagranjunction.com/

Hanuman Chalisa in Hindi

हनुमान चालिसा : भय, कष्ट और विकारों को करे दूर
HANUMAN

भारतीय हिंदू धर्म में भगवान हनुमान (Hanuman) को डर और कष्ट दूर भगाने के लिए काफी माना और पूजा जाता है. भगवान हनुमान(Hanuman) को भारत ही नहीं विदेशों में भी पूजा जाता है. वानर प्रजाति से संबंध रखने वाले भगवान हनुमान परम राम भक्त माने जाते हैं.

भगवान राम के भक्त होने के साथ हनुमान जी (Hanuman) को सर्वशक्तिमान माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि जो कोई भी सच्चे मन से हनुमान जी (Hanuman) की चालिसा का पाठ करता है उसको कभी भी भय आदि नहीं सताते. विकट समय में हनुमान चालिसा का पाठ करने से काल तक टल जाता है. आइए हम सभी मिलकर हनुमान चालिसा (Hanuman Chalisa) का पाठ करें और इसे कंठस्थ करें.

दोहा

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनऊँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार॥

चौपाई - हनुमान चालिसा – Hanuman Chalisa

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥
रामदूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥

महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी॥
कंचन बरन बिराज सुबेसा।
कानन कुंडल कुंचित केसा॥

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
काँधे मूँज जनेऊ साजै।
संकर सुवन केसरीनंदन।
तेज प्रताप महा जग बन्दन॥

विद्यावान गुनी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर॥
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया॥

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
बिकट रूप धरि लंक जरावा॥
भीम रूप धरि असुर सँहारे।
रामचंद्र के काज सँवारे॥

लाय सजीवन लखन जियाये।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये॥
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद सारद सहित अहीसा॥

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते।
कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते॥
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राज पद दीन्हा॥

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।
लंकेस्वर भए सब जग जाना॥
जुग सहस्र जोजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं॥
दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥

राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥
सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रक्षक काहू को डर ना॥

आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हाँक तें काँपै॥
भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै॥

नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा॥
संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥

सब पर राम तपस्वी राजा।
तिन के काज सकल तुम साजा।
और मनोरथ जो कोई लावै।
सोइ अमित जीवन फल पावै॥

चारों जुग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा॥
साधु संत के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे॥

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता॥
राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा॥

तुम्हरे भजन राम को पावै।
जनम-जनम के दुख बिसरावै॥
अन्तकाल रघुबर पुर जाई।
जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई॥

और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई॥
संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥

जै जै जै हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥
जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहि बंदि महा सुख होई॥

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा॥
तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय मँह डेरा॥

दोहा

पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥


Courtesy- www.devotionalsongs.jagranjunctin.com