कई बार ऐसा
होता है कि लोग दूसरों के नजरिए के आधार पर अपने बारे में गलत राय बना लेते हैं।
इसी कारण वे न तो पढ़ाई पर ध्यान दे पाते हैं और न ही लक्ष्य प्राप्त कर पाते
हैं। उन्हें लगता है कि उनमें कुछ भी अच्छा नहीं है और हीनता की भावना से भर
जाते हैं।
याद रखिए जो
कामयाब हैं वे इसलिए कि वे अपने को किसी से कम नहीं आंकते। वे हमेशा अपनी बेहतर
चीजों पर फोकस करते हुए अपना आत्मविश्वास बढ़ाते रहते हैं और अपने व्यक्तित्व को
चमकाते रहते हैं। इसलिए अपने भीतर झंकिए और दूसरों से अपने को बिल्कुल कम मत
आंकिए।
कई लोग इस
समस्या से जूझते दिखाई देते हैं कि न तो वे देखने में खूबसूरत हैं, न उनकी चाल अच्छी है। न उनकी आवाज अच्छी है
और न रवैया। वे दूसरों की धारणा पर अपने बारे में राय बना लेते हैं और परेशान
रहते हैं। वे जब भी आईना देखते हैं हमेशा अपने से नाखुश रहते हैं। वे अपनी पढ़ाई, करियर और जिंदगी से नाखुश रहते हैं। |
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सोमवार, 15 फ़रवरी 2016
खुद को कभी कमतर न आंकें
गुरुवार, 11 फ़रवरी 2016
दस बातें जो आपके जीवन को बदल देंगी..
हिन्दू धर्म
में दस यम और दस नियम को आचरण में शामिल किया गया है। नियम ही धर्म है। नियम का
पालन नहीं करने से व्यक्ति अनुशासन खो देता है और जीवन में कई तरह के संकटों से
घिर जाता है। धर्म के नियमों का पालन करने से जीवन में हमेशा सुख और शांति बनी
रहती है। इनका पालन नहीं करने से व्यक्ति चिंताग्रस्त रहकर रोग और शोक को
आमंत्रित कर लेता है।
सत्य बोलना हर
धर्म सत्य बोलना सिखाता है लेकिन कितने लोग हैं, जो इसका पालन करते हैं? मन, वचन और कर्म
से सत्यनिष्ठ रहना, दिए हुए वचनों
को निभाना, प्रियजनों से
कोई गुप्त बात नहीं रखना और उनके सामने झूठ नहीं बोलना ही सत्य नियम का पालन
करना है। |
शुक्रवार, 3 अप्रैल 2015
Patanjali Keswani Left His Job For Dreams
होटलियर इंडिया के 100 पावरफुल लोगों की लिस्ट में शामिल पातु केसवानी ने देश को चौथी सबसे बड़ी होटल सीरीज दी है। बता दें कि यह सक्सेस पातु की जोखिम की वजह से है। पातु ने अपने सपने के लिए जॉब छोड़कर जीवनभर की सारी जमा-पूंजी होटल कारोबार में इन्वेस्ट कर दिया था।
इंजीनियर पिता और चिकित्सक मां के पुत्र हैं पातु केसवानी। उनकी बहनें थिएटर एवं फिल्मों में काम करती हैं। पातु ने भी नाटकों में एक्टिंग किया, पर वे 'फ्लॉप एक्टर’ साबित हुए। वे पढ़ने में बेहतर थे। उन्होंने आईआईटी दिल्ली से बी.टेक और आईआईएम कोलकाता से एमबीए की डिग्री प्राप्त की और टाटा समूह का ताज होटल जॉइन कर लिया। प्रमोशन प्राप्त करते हुए वे ताज होटल के सीओओ बन गए। इस जॉब के दौरान ताज की हर प्रॉपर्टी की परफॉर्मेंस का उन्होंने स्टडी किया और अपने मन-मस्तिष्क में एक सफल होटल का काल्पनिक ढांचा तैयार किया। 2000 में वे इस जॉब से ऊब गए तो उन्होंने एक करोड़ रुपए के पे पैकेज पर एक इंटरनेशनल कंसल्टिंग फर्म को जॉइन कर लिया।
होटल इंडस्ट्री की मिसिंग को किया फोकस
इस जॉब के दौरान पातु केसवानी ने कई मल्टीनेशनल कंपनीज को इंडियन मार्केट में एंट्री दिलवाई, जिनमें होटल समूह भी थे। पातु केसवानी ने ऐसा करते हुए पाया कि इंडियन होटल इंडस्ट्री बिलकुल वैसा ही है, जैसा 25 वर्ष पूर्व इंडियन कार इंडस्ट्री था। आम आदमी के लिए इस मार्केट में तब एंबेसडर व फिएट थी, तो रईसों के लिए मसिर्डीज। इन दोनों के बीच की कड़ी मिसिंग थी। मार्केट की इस मिसिंग कड़ी को मारुति 800 ने पूरा किया था।
इस जॉब के दौरान पातु केसवानी ने कई मल्टीनेशनल कंपनीज को इंडियन मार्केट में एंट्री दिलवाई, जिनमें होटल समूह भी थे। पातु केसवानी ने ऐसा करते हुए पाया कि इंडियन होटल इंडस्ट्री बिलकुल वैसा ही है, जैसा 25 वर्ष पूर्व इंडियन कार इंडस्ट्री था। आम आदमी के लिए इस मार्केट में तब एंबेसडर व फिएट थी, तो रईसों के लिए मसिर्डीज। इन दोनों के बीच की कड़ी मिसिंग थी। मार्केट की इस मिसिंग कड़ी को मारुति 800 ने पूरा किया था।
आज 21 होटल प्रॉपर्टीज के मालिक
पातु केसवानी ने भी मारुति की तरह होटल इंडस्ट्री में क्रांति का सपना देखा और तय किया कि वे अब जॉब नहीं करेंगे। वे ऐसा होटल बनाएंगे, जिसका किराया स्टार होटल से आधा होगा और ऑपरेटिंग लागत एक तिहाई कम होगी। पातु ने अपनी सारी बचत करीब 1.25 करोड़ निवेश करके गुड़गांव में एक छोटा-सा भूखंड खरीदा था, जहां उन्हें 15 हजार वर्गफीट कंस्ट्रक्शन की अनुमति मिली। यहां बने होटल से उन्हें पहले ही साल 30 फीसदी रिटर्न मिला तो गुड़गांव में ही पातु ने 13 करोड़ रुपए लागत के साथ 30 कमरों का होटल बनाया। इसके बाद से लेमन ट्री होटल सीरीज फैलती ही गई। आज देश के 15 शहरों में 2500 से ज्यादा कमरों की 21 होटल प्रॉपर्टीज का वे संचालन कर रहे हैं।
पातु केसवानी ने भी मारुति की तरह होटल इंडस्ट्री में क्रांति का सपना देखा और तय किया कि वे अब जॉब नहीं करेंगे। वे ऐसा होटल बनाएंगे, जिसका किराया स्टार होटल से आधा होगा और ऑपरेटिंग लागत एक तिहाई कम होगी। पातु ने अपनी सारी बचत करीब 1.25 करोड़ निवेश करके गुड़गांव में एक छोटा-सा भूखंड खरीदा था, जहां उन्हें 15 हजार वर्गफीट कंस्ट्रक्शन की अनुमति मिली। यहां बने होटल से उन्हें पहले ही साल 30 फीसदी रिटर्न मिला तो गुड़गांव में ही पातु ने 13 करोड़ रुपए लागत के साथ 30 कमरों का होटल बनाया। इसके बाद से लेमन ट्री होटल सीरीज फैलती ही गई। आज देश के 15 शहरों में 2500 से ज्यादा कमरों की 21 होटल प्रॉपर्टीज का वे संचालन कर रहे हैं।
गुरुवार, 2 अप्रैल 2015
13 साल की उम्र में की वेबसाइट रजिस्टर, BE के बाद लॉन्च की ऑनलाइन कंपनी
एंटरप्रेन्योरशिप की दुनिया में रवितेज यदलम के एंट्री की कहानी दिलचस्प है। 13 वर्ष की उम्र से ई-कॉमर्स में रुचि के चलते रवितेज ने कॉलेज की पढ़ाई के दौरान ऑनलाइन बिक्री में प्रयोग करना शुरू किया। इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी होने के बाद केवल 23 वर्ष की उम्र में अपनी कूपन और कैशबैक शॉपिंग साइट लॉन्च की।
कंपनी : पेनीफुल डॉट कॉम
फाउंडर : रवितेज यदलम
क्या खास : भारत की सबसे बड़ी कूपन और कैशबैक शॉपिंग साइट जिसके जरिए ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले कस्टमर्स को कैशबैक की सुविधा बैंक अकाउंट या चेक के जरिए मुहैया करवाई जाती है।
फाउंडर : रवितेज यदलम
क्या खास : भारत की सबसे बड़ी कूपन और कैशबैक शॉपिंग साइट जिसके जरिए ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले कस्टमर्स को कैशबैक की सुविधा बैंक अकाउंट या चेक के जरिए मुहैया करवाई जाती है।
13 साल की उम्र में रवितेज यदलम ने अपनी पहली वेबसाइट रजिस्टर कर ली थी और 18 वर्ष की एज में पहली बार एक प्रोडक्ट (मोबाइल फोन) ऑनलाइन बेचा। हुआ यूं कि रवितेज ने जर्मनी के एक क्लाइंट को फोन उपलब्ध करवाने के लिए डील की थी। उस वक्त उसके पास फोन नहीं था। जब क्लाइंट का पेमेंट रवितेज को मिला तो उसने फोन खरीदकर उसके पते पर भेज दिया और अपने लिए कुछ बचत भी की। इस एक्सपीरियंस से रवितेज ने दो चीजें सीखीं। पहली यह कि इंटरनेट ने सारी भौगोलिक सीमाओं को खत्म कर दिया है और दूसरी कि वेब पर नई बिजनेस स्ट्रैटजीज के लिए अवसरों की भरमार है।
अपनी पहली इंटरनेट डील से प्रभावित होकर रवितेज ने कॉलेज के दिनों में ही ई-कॉमर्स मॉडल के साथ जोड़-तोड़ करना शुरू कर दिया। बेंगलुरू के आर वी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग में बीई करते हुए उसने कुछ वेंडर्स के साथ ऑनलाइन प्रोडक्ट्स बेचने का काम भी किया। कुछ वक्त बीतने के बाद रवितेज ने पाया कि एफिलिएट मार्केटिंग यानी मार्केटिंग का एक ऐसा प्लेटफॉर्म जहां शीर्ष के ऑनलाइन रिटेलर्स अपने उत्पाद किसी तीसरी पार्टी के माध्यम से बेच पाएं,अच्छे अवसर प्रदान कर सकता है। इन्हीं एक्सपीरियंस में रवितेज को अपने बिजनेस का आइडिया मिल गया।
फैमिली और दोस्तों से ली मदद
एफिलिएट मार्केटिंग पर काम करते हुए रवितेज ने पाया कि इस फील्ड में कस्टमर का विश्वास जीतना भी एक बड़ी चुनौती है। इस पर रवितेज ने खुद से यह सवाल किया कि कोई भी कस्टमर मेरे प्रतिस्पर्धी के सामने मुझे क्यों चुनेगा? इस सवाल के जवाब में उसे यह विचार आया कि उसे अपने कस्टमर्स को ऐसा ऑफर देना चाहिए जो उसके कॉम्पटीटर न दे रहे हों। इससे प्रेरित होकर रवितेज ने यह फैसला किया कि वह अपने कमीशन का कुछ हिस्सा अपने ग्राहकों के साथ शेयर करेगा। यहीं से रवितेज के जेहन में मार्च 2010 में एक कैशबैक पोर्टल लॉन्च करने का ख्याल आया। इस दिशा में आगे बढ़ते हुए उसने मार्केटिंग और डिजाइन के लिए दो लोगों को नियुक्त किया और अपनी कंपनी ईज गेट ऑनलाइन टेक्नोलॉजीज एलएलपी को रजिस्टर किया।
एफिलिएट मार्केटिंग पर काम करते हुए रवितेज ने पाया कि इस फील्ड में कस्टमर का विश्वास जीतना भी एक बड़ी चुनौती है। इस पर रवितेज ने खुद से यह सवाल किया कि कोई भी कस्टमर मेरे प्रतिस्पर्धी के सामने मुझे क्यों चुनेगा? इस सवाल के जवाब में उसे यह विचार आया कि उसे अपने कस्टमर्स को ऐसा ऑफर देना चाहिए जो उसके कॉम्पटीटर न दे रहे हों। इससे प्रेरित होकर रवितेज ने यह फैसला किया कि वह अपने कमीशन का कुछ हिस्सा अपने ग्राहकों के साथ शेयर करेगा। यहीं से रवितेज के जेहन में मार्च 2010 में एक कैशबैक पोर्टल लॉन्च करने का ख्याल आया। इस दिशा में आगे बढ़ते हुए उसने मार्केटिंग और डिजाइन के लिए दो लोगों को नियुक्त किया और अपनी कंपनी ईज गेट ऑनलाइन टेक्नोलॉजीज एलएलपी को रजिस्टर किया।
जनवरी, 2011 में उसने यूएस में भी एक सहायक कंपनी पेनीफुल डॉट काॅम रजिस्टर की। कंपनी में बुनियादी निवेश के लिए रवितेज ने अपने परिवार से करीब 4 लाख रुपए की आर्थिक मदद ली। अपने कारोबार को स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ते हुए उसने वेबसाइट डेवलपमेंट के लिए अपने दोस्त की सहायता ली और यूएस के ई-कॉमर्स मर्चेंट्स को साथ आने के लिए ईमेल भेजना और कॉल करना भी शुरू किया।
अमेरिका के बाद भारत में की लॉन्चिंग
शुरुआती दौर में पेनीफुल डॉट कॉम के खाते में सिर्फ 50 पार्टनर्स के नाम शामिल हुए लेकिन जल्द ही सोनी, बार्न्स एंड नोबल,एडिडास, बनाना रिपब्लिक और एयर फ्रांस जैसे बड़े नाम भी शामिल हो गए। कुछ वक्त बाद जब रवितेज ने भारत में ई-कॉमर्स को रफ्तार पकड़ते देखा तो नवंबर, 2011 में यहां भी पेनीफुल डॉट इन लॉन्च कर दिया। लॉन्चिंग के कुछ ही समय में कंपनी यहां के लगभग सभी ई-कॉमर्स पोर्टल्स को अपने साथ जोड़ चुकी है जिनमें क्लियर ट्रिप डॉट कॉम, शॉपर्स स्टॉप, नापतोल डॉट कॉम, यात्रा डॉट कॉम, फ्लिपकार्ट, स्नैपडील जैसे नाम शामिल हैं।
बड़ी कंपनियों में शामिल है वेंचर
तेजी से तरक्की कर रही इस कंपनी के पार्टनर्स की लिस्ट में 4,000 कंपनियां शामिल हो चुकी हैं। यही नहीं कंपनी का वर्तमान टर्नओवर 7 करोड़ रुपए के आंकड़े को पार कर चुका है। यही नहीं वर्ष 2013 में पेनीफुल को रेड हेरिंग एशिया टॉप 100 कंपनीज में भी शामिल किया गया। पेनीफुल ने कामयाबी के इस सफर में कई चुनौतियों का भी सामना किया है। रवितेज बताते हैं कि भारत में लोगों को कैशबैक के बारे में बताना काफी चैलेंजिंग था क्योंकि देश में आज भी लोग कैशबैक की अवधारणा से अनजान हैं। वहीं लोग इसे डिस्काउंट के समान मानते हैं और इसकी विश्वसनीयता पर कम ही यकीन करते हैं।
70 शहरों में चलती है इनकी कैब, लेकिन खुद के लिए नहीं खरीदी है कार
यह कहानी एक ऐसे आईआईटी पासआउट की है जिसने माइक्रोसॉफ्ट की जमी-जमाई नौकरी छोड़कर कैब कंपनी OLA स्थापित की। दिलचस्प यह भी है कि जिसकी कैब से 70 शहरों में लोग सफर करते हैं, उसने खुद के लिए कार नहीं खरीदा है।
संक्षिप्त परिचय
नाम : भाविश अग्रवाल
कंपनी : ओला
पोस्ट : सीईओ
क्या खास : देश के 70 शहरों में सक्रिय ओला हर दिन 1.50 लाख लोगों को आय के अनुरूप (10 से 17 रुपए प्रति कि.मी. की दर से) निजी परिवहन सुविधा उपलब्ध करवाती है।
नाम : भाविश अग्रवाल
कंपनी : ओला
पोस्ट : सीईओ
क्या खास : देश के 70 शहरों में सक्रिय ओला हर दिन 1.50 लाख लोगों को आय के अनुरूप (10 से 17 रुपए प्रति कि.मी. की दर से) निजी परिवहन सुविधा उपलब्ध करवाती है।
आईआईटी मुंबई के कम्प्यूटर साइंस व इंजीनियरिंग ग्रैजुएट (बीटेक) भाविश अग्रवाल ने 2010-11 में ओला कैब्स की स्थापना की तो परिवार और दोस्तों ने उन्हें ‘क्रेजी’ कहा। माइक्रोसॉफ्ट रिसर्च की नौकरी करते हुए भाविश ने अब तक दो पेटेंट्स प्राप्त किए थे। उनके तीन पेपर्स इंटरनेशनल जर्नल में प्रकाशित हुए थे, पर ग्लोबल बिजनेस एग्जीक्यूटिव बनने के बजाय वे सेल्फ मेड एंटरप्रेन्योर बनना चाहते थे। माइक्रोसॉफ्ट में सुरक्षित भविष्य भी 9 से 5 की जॉब, भाविश की उकताहट को कम नहीं कर पाया। भाविश कहते हैं, मैं हमेशा से ही खुद का कुछ शुरू करना चाहता था और यही वजह थी कि मैं विकल्प तलाश रहा था। लेकिन साथ ही मैं सोसायटी की किसी समस्या का समाधान प्रस्तुत करने के बारे में भी सोचा करता था।
इस सोच के साथ भाविश अपने वेंचर ओला कैब्स तक कैसे पहुंचे, इस सवाल के जवाब में वे कहते हैं, एक ट्रिप के खराब अनुभव से इसकी शुरुआत हुई। दरअसल एक बार बेंगलुरु से बांदीपुर की यात्रा में भाविश ने कार किराए पर बुक की थी, जिसका अनुभव बेहद खराब रहा। बीच रास्ते में ड्राइवर ने गाड़ी रोककर और पैसा देने की मांग की। मना करने पर उसने सफर वहीं रोकने की धमकी दी। उसके खराब बर्ताव की वजह से भाविश को कार छोड़कर बाकी की यात्रा बस से करनी पड़ी। इस वक्त भाविश को लगा कि इस समस्या का सामना बड़ी संख्या में उनके जैसे कई कस्टमर्स कर रहे हैं जो क्वालिटी कैब सर्विस की तलाश में हैं, लेकिन उनकी यह तलाश सफर के बुरे अनुभवों के साथ खत्म होती है। यहां भाविश को पहली बार कैब बुकिंग सर्विस में क्षमताएं नजर आईं।
तकनीकी पृष्ठभूमि ने की मदद
अपने टेक्नोलॉजी बैकग्राउंड के चलते भाविश ने कैब सर्विसेज और टेक्नोलॉजी को एक साथ जोड़ने के बारे में सोचा। ताकि कस्टमर्स को ऑनलाइन कार रेंटल बुकिंग्स, रिव्यू व रेटिंग के जरिए बेहतर क्वालिटी आश्वासन और कार व ड्राइवर के बारे में पूरी सूचना मिल पाए। अगस्त 2010 में भाविश ने ओला कैब्स की शुरुआत के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी और इस दिशा में काम शुरू किया। दिलचस्प है कि भाविश जैसी सोच रखने वाले उनके मित्र अंकित भाटी नवंबर 2010 में उनके भागीदार बने। अंकित ने भी आईआईटी से एमटेक और सीएडी (ऑटोमेशन) की डिग्री प्राप्त की थी। भाविश बताते हैं, जब मैंने शुरुआत की तो मेरे माता-पिता सोच रहे थे कि मैं ट्रैवल एजेंट बनने जा रहा हूं। उन्हें समझा पाना काफी मुश्किल था, लेकिन जब ओला कैब्स को पहली फंडिंग हासिल हुई तो उन्हें मेरे स्टार्टअप पर कुछ भरोसा हुआ।
नहीं खरीदी खुद के लिए कार
अपने आइडिया के प्रति समर्पण भाविश की इस सोच में झलकता है कि अपनी पत्नी के साथ उन्होंने पर्सनल व्हीकल न खरीदने का प्रण किया है ताकि वे आने जाने के लिए ओला का इस्तेमाल कर सकें। दृढ़ता के इसी स्तर ने भाविश को इस मुकाम तक पहुंचाया है। नए उद्यमियों के लिए भाविश की सलाह है कि सपने तो सब देखते हैं, पर कुछ ही लोग जोखिम उठाते हैं। जब जोखिम उठाएंगे तो कई लोग कई सलाह देंगे। सपने उनके पूरे होते हैं, जो सुनते सबकी हैं, पर करते मन की हैं।
अपने आइडिया के प्रति समर्पण भाविश की इस सोच में झलकता है कि अपनी पत्नी के साथ उन्होंने पर्सनल व्हीकल न खरीदने का प्रण किया है ताकि वे आने जाने के लिए ओला का इस्तेमाल कर सकें। दृढ़ता के इसी स्तर ने भाविश को इस मुकाम तक पहुंचाया है। नए उद्यमियों के लिए भाविश की सलाह है कि सपने तो सब देखते हैं, पर कुछ ही लोग जोखिम उठाते हैं। जब जोखिम उठाएंगे तो कई लोग कई सलाह देंगे। सपने उनके पूरे होते हैं, जो सुनते सबकी हैं, पर करते मन की हैं।
मालिक खुद बने ड्राइवर
ओला कैब्स का मकसद परेशानी मुक्त, विश्वसनीय और टेक्नोलॉजी युक्त कार रेंटल सर्विस भारतीय उपभोक्ताओं को उपलब्ध करवाना था। खुद की कारें खरीदने व उन्हें किराए पर देने के बजाया ओला कैब्स ने बड़ी संख्या में टैक्सी ड्राइवर्स के साथ पार्टनरशिप की और पूरे सेट अप में आधुनिक टेक्नोलॉजी को शामिल किया, जहां लोग शॉर्ट नोटिस पर कॉल सेंटर्स और एप्स के जरिए कार बुक कर सकते थे। इन बुकिंग्स में हाफ/फुल डे रेंटल और आउट स्टेशन टैक्सी शामिल थी। ओला कैब्स की स्थापना के बाद कई बार आईआईटी इंजीनियरिंग ग्रैजुएट संस्थापकों ने सारे कस्टमर कॉल्स खुद अटेंड किए तो कई बार ड्राइवर बनकर ग्राहकों को एयरपोर्ट छोड़ा। जहां अंकित भाटी ने तकनीकी मोर्चे की जिम्मेदारी ली तो भाविश ने ग्राहकों और बिजनेस एसोसिएट्स को संभाला।
विश्वसनीयता के लिए मेहनत
देश के इस असंगठित मार्केट में सहज व आरामदेय ट्रांसपोर्ट सुविधा उपलब्ध करवाना आसान नहीं था। भाविश अग्रवाल व अंकित भाटी ने कार निर्माता, वित्तीय संस्थानों व बीमा कंपनियों से संपर्क किया ताकि कैब ड्राइवरों को सहज शर्तों व कम ब्याज पर कर्ज मिले। अपने नेटवर्क से उन्हीं ड्राइवरों को जोड़ा, जिनका ट्रैक रिकार्ड साफ था। उन्हें कस्टमर सेवा का प्रशिक्षण दिलवाया। ओला के विस्तार के लिए निजी निवेशकों से पूंजी प्राप्त करने के लिए भी भाविश अग्रवाल को मशक्कत करनी पड़ी। लेकिन मेहनत का दामन दोनों हिस्सेदारों ने पकड़े रखा और इस उद्यमी जोड़ी ने तकनीक की मदद से कार रेंटल सेवा को झंझटमुक्त व विश्वसनीय बनाया।
70 शहर और 1 अरब की आय
60 परसेंट मार्केट शेयर के साथ ओला कैब्स (अब ओला) आज देश की सबसे बड़ी व तेजी से ग्रो हो रही कैब व ऑटो बुकिंग कंपनी है। 1 लाख से अधिक वाहनों के साथ देश के 70 शहरों में सक्रिय ओला प्रतिदिन 1.50 लाख लोगों को आय के अनुरूप (10 से 17 रुपए प्रति कि.मी. की दर से) निजी परिवहन सुविधा उपलब्ध करवाती है। मसलन लग्जरी ट्रैवल्स के लिए ओला प्राइम (टोयोटो इन्नोवा), कम्फर्टेबल ट्रैवलिंग के लिए ओला सेडान (टोयोटा इटिओट), इकोनॉमिक ट्रैवलिंग के लिए ओला मिनी (टाटा इंडिका), महिला यात्रियों के लिए महिला ड्राइवर की ओला पिंक और सबसे सस्ती ओला ऑटो।
इतना ही नहीं ओला द्वारा लाॅन्च स्मार्ट मोबाइल एप्लीकेशन कैब बुकिंग के लिए भारत का अग्रणी एप्लीकेशन है। बिजनेस के स्तर पर तीन सालों में कंपनी 1 बिलियन का आंकड़ा पार कर चुकी है और 2015 के अंत तक 100 शहरों में अपनी पहुंच बनाने की योजना बना रही है। इस सिलसिले में भाविश अग्रवाल ने चार बड़े प्राइवेट निवेशकों से 1281 करोड़ रुपए का निवेश जुटाया है तो अंकित भाटी ने अपने नेटवर्क (कैब मालिक/ड्राइवर और ग्राहकों) को इंटरनेट व फोन (लैंड लाइन व मोबाइल) से जोड़कर सबके लिए ‘विन-विन’ हालात पैदा किए हैं।
शुक्रवार, 10 अक्टूबर 2014
Pleasant Personality Develop करने के 10 Tips
| Develop your personality ! |
हम रोज़ाना बहुत से लोगों से मिलते हैं पर कुछ -एक लोग ही ऐसे होते हैं जो हमें प्रभावित कर जाते हैं . ऐसे लोगों के लिए ही हम कहते हैं कि , the person has got a pleasant personality. ऐसी personality वाले लोग अक्सर खुशहाल होते हैं और उनकी हर जगह respect होती है , उन्हें like किया जाता है , parties में invite किया जाता है और job में इन्हें promotion भी जल्दी मिलता है . Naturally, हम सभी ऐसी personality possess करना चाहेंगे और आज मैं अपने इस article में ऐसे ही 10 points share कर रहा हूँ जो आपको एक आकर्षक व्यक्तित्व पाने में help कर सकते हैं .
1. लोगों को genuinely like करिए :
जब हम किसी से मिलते हैं तो मन में उस person की एक image बना लेते हैं . ये image positive, negative या neutral हो सकती है . पर अगर हम अपनी personality improve करना चाहते हैं तो हमें इस image को intentionally positive बनाना होगा . हमें अपने mind को train करना होगा कि वो लोगों में अच्छाई खोजे बुराई नहीं . ये करना इतना मुश्किल नहीं है , अगर आप mind को अच्छाई खोजने के लिए निर्देश देंगे तो वो खोज निकालेगा .
हमें लोगों के साथ patient होना चाहिए, उनकी किसी कमी या shortcoming से irritate होने की बजाये खुद को उनकी जगह रख कर देखना चाहिए. क्या पता अगर हम भी उन्ही जैसे circumstnaces में पले-बढे होते तो उन जैसे ही होते!!! इसलिए differences को सेलिब्रेट करिए उनसे irritate मत होइये.
Friends, हमारे चारो -तरफ फैली negativity हमें बहुत प्रभावित करती है , हम रोज़ चोरी , धोखा -धडी , fraud की खबरें सुनते हैं और शायद इसी वजह से आदमी का आदमी पर से विश्वास उठता जा रहा है . मैं ये नहीं कहता की आप आँख -मूँद कर लोगों पर trust करिए , पर ये ज़रूर कहूँगा कि आँख -मूँद कर लोगों पर distrust मत करिए . ज्यादातर लोग अच्छे होते हैं ; कम से कम उनके साथ तो होते ही हैं जो उनके साथ अच्छा होता है , आप लोगों के साथ अच्छा बनिए , उन्हें like करिए और बदले में वे भी आपके साथ ऐसा ही करेंगे .
Ralph Waldo Emerson ने कहा भी है , “मैं जिस व्यक्ति से भी मिलता हूँ वह किसी ना किसी रूप में मुझसे बेहतर है.”
तो जब हर कोई हमसे किसी न किसी रूप में बेहतर है तो उसे like तो किया ही जा सकता है!
2. मुसकुराहट के साथ मिलिए :
जब आप अपने best friend से मिलते हैं तो क्या होता है ? आप एक दूसरे को देखकर smile करते हैं , isn’t it ?
मुस्कराना जाहिर करता है कि आप सामने वाले को पसंद करते हैं . यही बात हर तरह की relations में लागू होती है ; इसलिए आप जब भी किसी से मिलें ( of course कुछ exceptions हैं ) तो चहरे पर एक genuine smile लाइए , इससे लोग आपको पसंद करेंगे , आपसे मिलकर खुश होंगे .आपकी मुस्कराहट के जवाब में मुस्कराहट न मिले ऐसा कम ही होगा , और होता भी है तो let it be आपको अपना part अच्छे से play करना है बस .
ये सुनने में काफी आसान लग रहा होगा , करना ही क्या है , बस हल्का सा smile ही तो करना है , बहुत से log naturally ऐसा करते भी हैं ; पर बहुत से लोग इस छोटी सी बात पर गौर नहीं करते , और अगर आप भी नहीं करते तो इसे अपनी practice में लाइए . एक मुस्कुराता चेहरा एक flat या stern face से कहीं अधिक आकर्षक होता है , और आपकी personality को attractive बनाने में बहुत मददगार होता है .
मुस्कुराने से एक और फायदा भी है , as per some research; जब हम अन्दर से खुश होते हैं तो हमारे एक्सटर्नल expressions उसी हिसाब से change हो जाते हैं , हमें देखकर ही लोग समझ जाते हैं कि हम खुश हैं ; और ठीक इसका उल्टा भी सही है , यानि जब हम अपने बाहरी expressions खुशनुमा बना लेते हैं तो उसका असर हमारे internal mood पर भी पड़ता है और वो अच्छा हो जाता है .
So, don’t forget to carry a sweet smile wherever you go.
3. नाम रहे ध्यान :
किसी व्यक्ति के लिए उसका नाम दुनिया के बाकी सभी नामों से ज्यादा importance रखता है . इसिलए जब आप किसी से बात करें तो बीच -बीच में उसका नाम लेते रहिये . Of course अगर व्यक्ति आपसे senior है तो आपको नाम के साथ ज़रूरी suffix या prefix लगाना होगा .
बीच -बीच में नाम लेने से सामने वाला अपनी importance feel करता है और साथ ही आपकी तरफ ध्यान भी अधिक देता है . And definitely वो इस बात से खुश होता है कि आप उसके नाम को importance दे रहे हैं .
Friends, नाम याद रखने में मैं भी थोडा कच्चा था , यहाँ तक कि कई बार नाम जानने के 2 minute बाद ही वो ध्यान से उतर जाता था . ऐसा basically इसलिए होता था क्योंकि मैं नाम याद रखने की कोशिश ही नहीं करता था ; पर अब मैं intentionally एक बार नाम सुनने के बाद उसे याद रखने की कोशिश करता हूँ . आप भी “नाम की महत्ता को समझिये ” , नाम याद रखना आपको एक बहुत बड़ी edge दे देता है .
4. “I” से पहले “You” को रखिये:
आप किसे अधिक पसंद करेंगे : जो अपने मतलब की बात करे या उसे जो आपके मतलब की बात करे ?
Of course आप दूसरा option choose करेंगे …हर एक इंसान पहले खुद को रखने में लगा हुआ है …मैं ऐसा हूँ , मुझे ये अच्छा लगता है , मैं ये करता हूँ ….isn’t it . पर आप इससे अलग करिए आप “I” से पहले “You” को रखिये .
आप कैसे हैं “, आपको क्या अच्छा लगता है ? , आप क्या करते हैं , ?
I bet, ऐसा करने से लोग आपको कहीं अधिक पसंद करेंगे . अगर अपनी बात करूँ तो अगर आप मुझसे AKC के बारे में बात करेंगे तो मैं आपको बहुत पसंद करूँगा. 
सिर्फ actors, cricketers, या writers ही नहीं एक आम आदमी भी audience चाहता है …जब आप एक आम आदमी के audience बनते हैं तो आप उसके लिए ख़ास हो जाते हैं . और जब आप बहुत से लोगों के साथ ऐसा करते हैं तो आप बहुत से लोगों के लिए ख़ास हो जाते हैं and in the process आप एक Person से बढ़कर एक Personality बन जाते हैं , एक ऐसी personality जिसे सभी पसंद करते हैं , जिसका charisma सभी को influence कर जाता है .
5. बोलने से पहले सुनिए:
इसे आप पॉइंट 4 का extension कह सकते हैं . जब आप दूसरे में interest लेते हैं तो इसमें इमानदारी होनी चाहिए . आपने “ आप क्या पसंद करते हैं ?” इसलिए नहीं पूछा कि बस वो जल्दी से अपना जवाब ख़तम करे और आप अपनी राम -कथा सुनाने लग जाएं .
आपको सामने वाले को सिर्फ पहले बोलने का मौका ही नहीं देना है , बल्कि उसकी बात को ध्यान से सुनना भी है और बीच -बीच में उससे related और भी बातें करनी हैं . For ex: अगर कोई कहता है कि उसे घूमने का शौक है , तो आप उससे पूछ सकते हैं कि उसकी favourite tourist destination क्या है , और वहां पर कौन -कौन सी जगह अच्छी हैं .
अच्छे listeners की demand कभी कम नहीं होती आप एक अच्छा listener बनिए और देखिये कि किस तरह आपकी demand बढ़ जाती है .
6. क्या कहते हैं से भी ज़रूरी है कैसे कहते हैं :
आप जो बोलते हैं उससे भी अधिक महत्त्व रखता है कि आप कैसे बोलते हैं . For ex. आपसे कोई गलती हुई और आप मुंह बना कर sorry बोलते हैं तो उस sorry का कोई मतलब नहीं . हमें न सिर्फ सही words use करने हैं बल्कि उन्हें किस तरह से कहा जा रहा है इस बात का भी ध्यान रखना है .
इसलिए आप अपनी tone और body language पे ध्यान दीजिये , जितना हो सके polite और well-mannered तरीके से लोगों से बात करिए .
यहाँ मैं ये भी कहना चाहूँगा कि बहुत से लोग English बोलने की ability को Personality से relate कर के देखते हैं , जबकि ऐसा नहीं है , आप बिना A,B,C जाने भी एक प्रभावशाली व्यक्तित्व वाले इंसान बन सकते हैं .
7. बिना अपना फायदा सोचे लोगों की help करिए :
कई बार हम ऐसी स्थिति में होते हैं कि दूसरों की help कर सकें , पर out of laziness या फिर ये सोचकर कि इसमें हमारा कोई फायदा नहीं है हम help नहीं करते . पर एक pleasant personality वाला व्यक्ति लोगों की help के लिए तैयार रहता है . हाँ , इसका ये मतलब नहीं है कि आप अपने ज़रूरी काम छोड़ कर बस लोगों की help ही करते रहे , लेकिन अगर थोडा वक़्त देने पर आप किसी के काम आ सकते हैं तो ज़रूर आएं . आपकी एक selfless help आपको दूसरों की ही नहीं अपनी नज़रों में भी उठा देगी और आप अच्छा feel करेंगे .
आपने सुना भी होगा ; “A little bit of fragrance always clings to the hands that gives you roses”
8. अपने external appearance को अच्छा बनाइये :
चूँकि हमारा पहला impression हमारी appearance की वजह से ही बनता है इसलिए इस point पर थोडा ध्यान देने की ज़रुरत है .
Appearance से मेरा ये मतलब नहीं है कि आप Gym जाने लगिए और body बनाइये , या फिर beauty –parlour के चक्कर लगाते रहिये , it simply means कि आप occasion के हिसाब से dress-up होइये और personal hygiene पर ध्यान द्जिये . छोटी –छोटी बातें जैसे कि आपका hair-cut , nails और polished shoe आपकी personality पर प्रभाव डालते हैं .
9. क्या appreciate कर सकते हैं खोजिये :
चाहे मैं हूँ , आप हों , या फिर Mr. Bachchan , तारीफ सुनना सबको पसंद है . लोगों का दिल जीतने का और अपना friend बनाने का ये एक शानदार formula है …प्रशंशा कीजिये , सच्ची प्रशंशा कीजिये .
India में ना जाने क्यों किसी की तारीफ़ करना इतना कठिन हो जाता है … शादियों में जो ऑर्केस्ट्रा होती है उसमे ज़रूर गए होंगे ….बेचारा गायक एक शानदार गीत गाता है है और तालियाँ बजाने की बजाये लोग एक -दूसरे के चेहरे देखने लगते हैं …; अच्छा हुआ मैं orchestra में नहीं गाता नहीं तो ऐसी audience की वजह से depression में चला जाता . 
खैर , मैं यहाँ individual level पे praise करने की बात कर रहा हूँ . अगर आप खोजेंगे तो हर इंसान में आपको तारीफ करने के लिए कुछ न कुछ दिख जाएगा ….वो कुछ भी हो सकता है …उसका garden, coins का collection, बढियां से सजाया कमरा , उसकी smile, उसका नाम , कुछ भी , खोजिये तो सही आपको दिख ही जायेगा . और जब दिख जाए तो दब्बू बन कर मत बैठे रहिये , किसी की तारीफ़ करके आप उसे वो देंगे जो वो दिल से चाहता है …आप उसकी ख़ुशी को बढ़ा देंगे , उसका दिन बना देंगे , और सबसे बड़ी चीज आप उसे वो काम आगे भी carry करने के लिए fuel दे देंगे . अगर सामने बोलने से हिचकते हैं तो बाद में एक sms कर दीजिये , मेल से बता दीजिये , पर अगर कुछ praiseworthy है तो उसे praise ज़रूर करिए .
हाँ अगर बहुत कोशिश करने पर भी वो ना मिले तो don’t try to fake it…बच्चे भी समझ जाते हैं कि आप सच्ची तारीफ कर रहे हैं या झूठी .
10. लगातार observe और improve करते रहिये :
Personality development एक on-going process है . हम सब में improvement का infinite scope है , इसलिए कभी ये मत समझिये कि बस अब जिंतना improvement होना था हो गया , बल्कि अपने लिए कुछ समय निकाल कर अपनी activities, अपने words को minutely observe करिए , आपने क्या किया , आप उसे और अच्छा कैसे कर सकते हैं , कहीं ऐसा तो नहीं कि आप किसी चीज को लेकर खुद को तीस-मारखां समझ रहे हैं और हकीकत में लोग आपकी इस बात को पसंद नहीं करते .
For ex. कुछ साल पहले मैंने realize किया कि लोगों में जल्दी improvement लाने के चक्कर में मैं इतने अधिक mistakes point out कर देता कि उनका confidence कम हो जाता ; so I improved on this point और अब मैं patiently ये काम करता हूँ .आप भी इस रास्ते पर बढ़ते हुए खुद को observe करते चलिए , और लगातार improve करते जाइये .
I hope ये 10 बातें आपको अपनी personality pleasant बनाने में help करेंगी .
अब क्या करना है ?
अब आपको इन दस बातों की बारी-बारी से प्रैक्टिस करनी है. To start with आप अपनी पसंद का कोई एक point choose कर लें , ध्यान रहे कि एक बार में सिर्फ और सिर्फ एक point पर ही focus करना है . Choose करने के बाद इसे real life में apply करें . अपनी day-today activities में खुद पर नज़र रखें और देखें कि आप सचमुच उसे apply कर पा रहे हैं या नहीं . जब एक हफ्ते ऐसा कर लें तो दूसरे point को उठाएं और अब उसकी practice करें . इस दौरान आप पहले point को भी apply करते रहे , पर अगर वो miss भी हो जाता है to don’t worry फिलहाल आपका focus point 2 है , और वो नहीं miss होना चाहिए .
इसी तरह से आप बाकी points की भी practice करते रहिये , और कुछ ही महीनो में आप पाएंगे कि एक साथ सारी बातों पर ध्यान दे पा रहे हैं . Just be patient and keep on moving , and surely आप जल्द ही एक pleasant personality के मालिक होंगे .
All the best!
दिल की सुनने में आने वाले 7 challenges !
सुनें दिल की आवाज़
हम अक्सर सुनते हैं कि हमें अपने दिल की सुननी चाहिए …जिस काम में मन लगे वो करना चाहिए …अपने passion को follow करना चाहिए …, उसी को अपना career बनाना चाहिए …etc. ये बातें बिलकुल सही हैं , मैंने खुद भी अपने कुछ articles में इन चीजों पर जोर दिया है , पर एक सच ये भी है कि हममे से ज्यादातर लोग ऐसा नहीं करते. तो सवाल उठता है कि क्यों ज्यादातर लोग लाइफ में जो आसानी से मिल जाता है उसे ही अपनी किस्मत मान लेते हैं और बस यूँही सस्ते में अपनी ज़िन्दगी बिता देते हैं ?
ऐसा शायद इसलिए होता है क्योंकि दिल की सुनना आसान नहीं होता …इसमें कई challenges आते हैं , और आज मैं ऐसे ही कुछ challenges के बारे में आपसे अपनी thoughts share कर रहा हूँ . इन्हें share करने का मेरा motive ये है कि यदि आप उनमे से हैं जो अपने सपनो को पूरा करने में लगे हैं या future में लगने वाले हैं तो इन challenges से घबराएं नहीं …आप अकेले इनका सामना नहीं कर रहे हैं …आपकी gene का हर आदमी more or less in challenges को face करता है , कुछ इनके आगे निकल जाते हैं तो कुछ हार मान लेते हैं. अब ये आप पर depend करता है कि आप क्या करते हैं!!!
तो आइये जानते हैं इन 7 challenges को :
1) Society का opposition:
यदि आपका passion लीक से हटकर हो तो आप को समाज के विरोध के लिए तैयार रहना चाहिए . सबसे ज्यादा opposition तो आपकी family से ही हो सकता है …क्योंकि वही आपकी सबसे अधिक चिंता करते हैं . ख़ास तौर पर middle class families जहाँ job को ही सबसे safe माना जाता है वहां यदि आप कुछ entrepreneurial करने का सोचते हैं तो family आपके खिलाफ हो जाती है . उनका विरोध human nature के इस fact को दर्शाता है कि हम unknown या कुछ नए को accept करने से डरते हैं ….पर जब आप अपने काम में लगे रहते हैं तो धीरे धीरे वही लोग आपकी मदद में सामने आ जाते हैं . इसलिए इस initial opposition को part of process समझें और इससे घबराये नहीं . जहाँ तक हो सके बस अपनी family को confidence में लेने का प्रयास करें , बाकियों का तो सोचे भी नहीं .
2) दोस्त आगे निकल जाते हैं :
सभी का अपना -अपना friend circle होता है , मौज – मस्ती होती है .. exam की tension होती है … हम बड़े होते हैं और फिर ज़िन्दगी की so called race में लग जाते हैं …..ज्यादातर लोग conventional wisdom अपनाते हुए , doctor ,engineer, सरकारी नौकरी …etc के चक्कर में लग जाते हैं और देर -सबेर इसमें कामयाब भी हो जाते हैं . अगर सचमुच आप दिल से यही करना चाहते थे तो इसमें कोई बुराई नहीं है ….दिल की सुनना हमेशा ….singer , cricketer या actor बनना ही नहीं होता ….ये Engineer, doctor बन कर देश की सेवा करना भी हो सकता है . और एक दूसरे case में भी यह करना सही है – जब आप clear नहीं होते की आप दरअसल life में करना क्या चाहते हैं, तो भी आप यही रास्ता चुन सकते हैं ..इसमें कम से कम आप financially secure रहेंगे , जो कि बेहद ज़रूरी है .
Challenge तब आता है जब आप अपने life goals को लेकर clear होते हैं , और अपने रास्ते पर निकल पड़ते हैं . और ऐसा life की किसी भी stage में हो सकता है , पहले हो जाता है तो ठीक है , पर अधिकतर ये clarity थोड़ी देर से आती है इसलिए जब आप इस दिशा में बढ़ते हैं तो आप पाते हैं कि अभी आपने शुरुआत भर की है और आपके बाकी दोस्त conventional path follow करते हुए एक well- settled life ( society की नज़र में ) की तरफ बढ़ चुके हैं . यहाँ आपको थोड़ी उलझन हो सकती है , आपके मन में doubt आ सकता है कि आप ही की उम्र के लोग इतने पैसे कमा रहे हैं और आप अभी struggle ही कर रहे हैं …..ऐसा लग सकता है कि आप कहीं गलती तो नहीं कर रहे हैं , और यहीं पर आपको डंटे रहना है .
अपने काम में believe करिए , इन distractions की life बहुत छोटी होती है , अगर आप सचमुच अपने काम को लेकर passionate हैं तो आप जल्द ही इनसे पार पा लेंगे . जब अमिताभ बच्चन को 27-28 साल की उम्र में पहली बार फिल्मो में ब्रेक मिला था तो उस वक़्त तक उनके भी बहुत सारे classmates अच्छी नौकरियों में settle हो चुके थे , ऐसे में उनके भी अन्दर सवाल उठे होंगे , पर उन्होंने उन distractions को खुद पर हावी नहीं होने दिया और इतने महान अभिनेता बने .
आप भी औरों के आगे निकलने से परेशान मत होइए , ….लम्बी race के घोड़े शुरू में धीमे-धीमे ही दौड़ते हैं .
3) सफलता के लिए लम्बा इंतज़ार :
कई बार लोग कामयाबी के बहुत करीब पहुच कर हार मान लेते हैं . आपको ध्यान देना होगा कि आप अपने काम को अंजाम तक पहुचाएं , किसी भी काम को करने में time तो लगता ही है और जब काम बड़ा हो तो समय भी बड़ा लगता है .
Kentucky Fried Chicken (KFC) के founder Colonel Sanders ने जब अपनी business idea के लिए लोगों को convince करना चाहा तो उन्हें हज़ार से भी अधिक बार ना सुननी पड़ी. वह अपनी कार में एक शहर से दूसरे शहर घूमते रहे और restaurant मालिकों से मिलते रहे , और इस दौरान कई बार उन्हें अपनी कार में ही सोना पड़ता था. पर इतनी ना सुनने के बाद भी उन्हें अपनी चिकन बनाने की secret recipe पर यकीन था और देर से ही सही पर उन्हें सफलता मिली और आज KFC दुनिया भर में एक successful brand के रूप में जाना जाता है.
4) आपके दिल का काम financially rewarding ….नहीं भी हो सकता है :
May be आप जिस चीज को लेकर passionate हैं वो आपको satisfaction तो दे पर उतने पैसे ना दे . For example आप as a social activist काम करना चाहते हों , या किसी NGO के लिए अपना time देना चाहते हों . तो ऐसे में आपको पहले से अपना mind make-up कर के रखना होगा कि आप वो पा रहे हैं जो पैसे से नहीं पाया जा सकता और इसी सोच के साथ आपको अपने काम में लगे रहना होता है .
यहाँ मैं एक चीज ज़रूर कहना चाहूँगा कि ऐसी fields में भी जब आप fully involved हो कर काम करते हैं तो देर -सबेर आपको financially भी इसका reward मिलता है , आप निःस्वार्थ भाव से अपने काम में लगे रहिये आपका काम ही आपका reward है .
5) Boredom:
ऐसा भी होता है कि आप जिस चीज को करना बहुत अधिक पसंद करते हैं उसी को करने में बोरीयत होने लगे , ऐसे में आपको ये नहीं सोचना चाहिए कि आपका passion ख़तम हो गया है बल्कि अपने काम को interesting बनाने के लिए नए तरीके और ideas खोजने चाहिए . कुछ दिन में खुद -बखुद boredom ख़तम हो जायेगा और आप फिर से उसी जोशो -जूनून के साथ अपने dream को pursue कर पायेंगे .
इतना ध्यान रखिये कि अपने दिल की सुनने वाला हर एक सफल व्यक्ति कभी ना कभी इस phase से गुजरता है इसलिए अगर आप भी इस phase से गुजरें तो just be relaxed….ये भी सफलता के मार्ग में आने वाले एक पड़ाव भर है .
6) Focus loose करना :
I think ये सबसे बड़ा challenge है जो ज्यादातर सपनो को पूरा नहीं होने देता . मेरी तरह आपने भी कई बार लोगों को यह कहते सुना होगा कि , “ Well begun is half done….पहला step लेना ही सबसे कठिन है उसके बाद सब हो जाता है ….etc” पर मुझे लगता है कि पहला step लेना आसान है , आप कोई भी काम कुछ effort डाल कर शुरू कर सकते हैं …कठिन तो उसे पूरा करना है, उसमे सफलता पाना है.
होता क्या है कि आप पूरी energy के साथ अपने दिल के कहे रास्ते पर बढ़ते हैं , पर कुछ दूर जाने के बाद ही आपको कई नए alternatives दिखने लगते हैं ….आपके मन में आने लगता है कि शायद ये काम छोड़ कर वो करें तो ज्यादा अच्छा रहेगा … फिर आप जो कर रहे होते हैं उसमे आपका focus कम होने लगता है …आप दूसरी idea की तरफ attract होने लगते हैं …और ऐसा करने से आप जो कर रहे होते हैं उसमे भी आप अपना 100% नहीं दे पाते हैं and ultimately success से दूर रह जाते हैं . इसलिए ज़रूरी है कि आप अपने आगाज़ को अंजाम तक पहुंचाएं , बीच में अपना focus ना loose करें .
स्वामी विवेकानंद ने भी सफल होने के लिए यही मन्त्र दिया है , “
“ एक विचार लो . उस विचार को अपना जीवन बना लो – उसके बारे में सोचो उसके सपने देखो , उस विचार को जियो . अपने मस्तिष्क , मांसपेशियों , नसों , शरीर के हर हिस्से को उस विचार में डूब जाने दो , और बाकी सभी विचार को किनारे रख दो . यही सफल होने का तरीका है.”
7) आपको ये पता चलना कि आप जो कर रहे हैं वो आपका passion नहीं है :
Shockingggg !!! लेकिन ये एक बहुत ही common scenario है, भले ही आप खुद इसे accept करने से कतराएं .
हर दिन हर पल हम बदल रहे हैं , हम तब तक अपनी true liking नहीं जान पाते जब तक हम उस काम को practically कर के नहीं देखते . हम कोई article पढ़ के , कोई program देख के, किसी दोस्त के influence में , या किसी और वजह से किसी काम को अपना passion समझ लेते हैं और उसे करना शुरू करते हैं पर कुछ दिनों बाद ही हम उस काम से उबने लगते हैं , to the extent that हम उसे करना ही नहीं चाहते . यह कुछ कुछ Boredom जैसा ही है पर ये boredom का बहुत बड़ा और बिगड़ा हुआ रूप है जिसमे आप धीरे -धीरे उस काम को ना करने के excuses खोजने लगते हैं .
जब ऐसा हो तो क्या करें ? Simple, अपने नए passion की तालाश शुरू करें , और उसे भी practically apply करके देखें , और अगर इस बार भी आपको लगे कि ये आपके दिल की आवाज़ नहीं है तो फिर अपने असली जूनून को खोजने में जुट जाएं . ये जीवन भर बेमन का काम करने से अच्छा है कि देर से ही सही पर आप अपना passion खोज पाएं , और जब तक आपको यह नहीं मिलता तब तक खुद को financially support करने के लिए कुछ और भी करते रहे ,may be a 9 to 5 job…tuition पढ़ाना …family business….etc, पर अपने passion की तालाश को रोकें नहीं …उसे खोज निकालें …एक दिन यही खोज आपको mediocre life से निकाल कर superior life की तरफ ले जायेगी.
Friends, तो ये थे वो सात challenges जो आमतौर पर आपको दिल की आवाज़ सुनने में face करने पड़ सकते हैं , पर ध्यान रहे कि ये कोई comprehensive list नहीं है , इसके आलावा भी कई और challenges हैं जो आपके सामने आ सकते हैं , जैसे कि पैसों की कमी , परिवार की जिम्मेदारी , etc. पर इन सब के बावजूद passionate लोग वो सब कुछ कर गुजरते हैं जो वो करना चाहते हैं ….आप भी इन challenges की वजह से अपने जोश को ठंढा मत पड़ने दीजिये और अपने dreams को reality बना कर दिखाइए , तभी जीने का असली मजा है .
All the best 
शनिवार, 9 अगस्त 2014
स्वामी विवेकानंद के जीवन के तीन प्रेरक प्रसंग
प्रेरक
प्रसंग : पुत्र के लिए प्रार्थना
प्रत्येक माता के मन में यह भाव स्वाभाविक
होता है कि उसकी संतान कुल की कीर्ति को उज्जवल करे. प्रथम दो संताने
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| Swami Vivekananda |
शिशुवय में ही मर गयी थीं, इसीलिए माता भुवनेश्वरी देवी प्रतिदिन शिवजी को
प्रार्थना करती कि ‘हे शिव ! मुझे तुम्हारे जैसा पुत्र दो.’ काशी में निवास कर रहे एक परिचित व्यक्ति को
कह कर उन्हों ने एक वर्ष तक वीरेश्वर शिवजी की
पूजा भी करवाई थी.
माता भुवनेश्वरी का मन-चित्त भगवान शंकर को
सतत याद करके प्रार्थना किया करता. एक रात्रि को स्वप्नमें उन्हें महादेव जी को
बाल रूप में अपनी गोद में विराजित भी देखा. जागने के बाद वे ‘जय शंकर, जय भोलेनाथ !’
ऐसा बोल कर
प्रार्थना करने लगीं. थोड़े महिनो के बाद उन्होंने पुत्रको जन्म दिया. दि.१२ जनवरी, 1863 का दिन और पवित्र मकरसंक्रांति जैसे पर्व पर महादेव जी की कृपा से प्राप्त हुए पुत्र को माता ने नाम दिया ‘वीरेश्वर’. लेकिन लाड-प्यार में सब उसे ‘बिले’ कहेकर बुलाते थे. थोड़े समय के पश्चात् उसका नाम ‘नरेन्द्रनाथ’ रखा गया. और आगे चल कर यही नरेंद्रनाथ स्वामी विवेकानंद के नाम से पूरे विश्व में विख्यात हुआ।
प्रार्थना करने लगीं. थोड़े महिनो के बाद उन्होंने पुत्रको जन्म दिया. दि.१२ जनवरी, 1863 का दिन और पवित्र मकरसंक्रांति जैसे पर्व पर महादेव जी की कृपा से प्राप्त हुए पुत्र को माता ने नाम दिया ‘वीरेश्वर’. लेकिन लाड-प्यार में सब उसे ‘बिले’ कहेकर बुलाते थे. थोड़े समय के पश्चात् उसका नाम ‘नरेन्द्रनाथ’ रखा गया. और आगे चल कर यही नरेंद्रनाथ स्वामी विवेकानंद के नाम से पूरे विश्व में विख्यात हुआ।
प्रेरक
प्रसंग : सच्ची शिवपूजा
नरेन्द्र की आयु ६ वर्षकी थी. अपने मित्रो के
साथ वह मेले में गया. मेले में से नरेन्द्र ने एक शिव जी की मूर्ति
खरीदी. मेले में समय कब बीत गया पता ही नहीं चला , संध्या हुई,
अँधेरा छाने
लगा तब नरेन्द्र तथा सभी मित्र जल्दी से चलते-चलते घर की ओर जाने लगे.
नरेन्द्र अपने मित्रों के एक हाथ में मूर्ति
लिए आगे-आगे चल रहा था,
पर उनमे से
एक मित्र कुछ पीछे रह गया था. अचानक नरेन्द्र ने उसे मुड़ कर देखा कि एक घोड़ागाड़ी
उस मित्र की तरफ तेज गति से आ रही है . टक्कर निश्चित जान पड़ रही थी पर ऐसी स्थिति
में भी नरेंद्र घबराया नहीं , वह एकहाथ में शिवजी की मूर्ति लिए ही एकदम से दौड़ पड़ा। देखने वाले चीखे , “अरे ! गया, अरे ! गया’”
पर ऐन मौके
पर नरेंद्र ने मित्र का हाथ पकड़कर एक ओर खींच लिया.
छोटे लड़केकी बहादुरी तथा समयसूचकता को देखकर सभी दंग रहे गए. नरेन्द्र ने घर जाकर जब माँ
को यह बात बताई तब माँ ने उसे अपने दिल से लगा कर कहा कि “मेरे बेटे ! आज तूने एक बहादुरी का काम किया है. ऐसे कार्य हंमेशा ही करते रहना.
तेरे ऐसे काम से मुझे बहुत प्रसन्नता होगी. और यही सच्ची शिवपूजा है.
प्रेरक
प्रसंग : नरेन्द्र की हिम्मत तथा करुणा
नरेन्द्र नियमित व्यायामशाला में जाता था.
अखाड़ा का सदस्य बनकर नरेन्द्रनाथ ने लाठी-खड़ग चलाना सीखा. तैरना, नौकाचालन, कुस्ती तथा अन्य खेलों में भी प्रवीणता प्राप्त की. एकबार ‘बॉक्सिंग’ की एक प्रतिस्पर्धा में उन्हें प्रथम पुरस्कार भी मिला था.
एक दिन मित्रों के साथ मिलकर मैदान में वह एक
खम्भा खड़ा कर रहा था. रास्ते से गुजर रहे लोग देखने के लिए खड़े हो जाते , लेकिन कोई भी मदद के लिए आगे नहीं आता. उसी समय एक अंग्रेज
नाविक वहाँ आया ओर वह भी लड़कों की मदद करने लगा. सब मिलकर एक भारी खम्भा उठा रहे
थे ,
तभी अचानक
खम्भा उस नाविक के माथे पर आ टकराया ओर उसे गंभीर
चोट लगी. वह बेहोश हो गया. सभी को लगा कि वह मर गया. नरेन्द्र ओर एक-दो मित्रों के
अलावा सभी डर कर भाग गए. नरेन्द्र ने अपनी धोती फाड़ कर उसकी पट्टी बना
बेहोश नाविक के माथे पर बांधी. फिर उसके मुह पर जल का छिड़काव किया.
थोड़ी देर के बाद जब वह होश में आया तो उसे पासवाले ‘स्कूल’ में ले जाकर सुलाया. डॉक्टर को बुलाया गया और उसका उपचार कराया गया . जब तक वह
नाविक अच्छा नहीं हुआ तब तक उसका खाना-पीना, दवाई का प्रबन्ध किया गया. बाद में जब वह ठीक हो गया तब मित्रों के पास से पैसे इकट्ठे कर उसे विदा किया गया।
नरेंद्र और साथियों के इस व्यवहार से अंग्रेज नाविक भी गदगद हो गया !
दिलीप पारेख
सूरत, गुजरात
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We are grateful to Dilip Ji for sharing these inspirational
incidents from Swami
Vivekananda’s life
in Hindi with FV readers.
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