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रविवार, 15 जून 2014

फादर्स जिन्होंने पलट कर रख दी दुनिया


         Vint Cerf


फादर ऑफ इंटरनेट: आज इंटरनेट जितना जाना-पहचाना लगता है, आज से कुछ दशक पहले तक सा नहीं था। इंटरनेट की अवधारणा को जन्म दिया विन्टन जी सर्फ ने, जिन्हें प्यार से विंट कहा जाता है। अमरीका के डिफेंस डिपार्टमेंट ने सबसे पहले 1960 के दशक में इंटरनेट का इस्तेमाल सुरक्षा प्रणाली के लिए किया था। इस आविष्कार के कारण ही विंट को अमेरिका का सर्वोच्च सम्मान प्रेजिडेंशियल मेडल ऑफ फ्रीडम दिया गया।

Charles Babbage



फादर ऑफ कम्प्यूटर: हमारी जिन्दगी का अहम हिस्सा हो चुके कम्प्यूटर के जनक हैं चाल्र्स बाबेज, क्योंकि उन्होंने 1837 में एनालिटिकल इंजिन की अवधारणा दुनिया के सामने रखी। यह दुर्भाग्यपूर्ण था कि पर्याप्त धनराशि न होने के कारण चाल्र्स बाबेज के जिन्दा रहने तक उनके इस कॉन्सेप्ट ने मूर्त रूप नहीं लिया। सन् 1910 में बाबेज के छोटे बेटे हेनेरी बाबेज ने उनकी बनाई मशीन को असेंबल किया।

 Henry Edward Roberts

फादर ऑफ पीसी: पी.सी. के नाम से मशहूर पर्सनल कम्प्यूटर का जनक माना जाता है हेनरी एडवर्ड रॉबर्ट्स को। वह एक अमेरिकी इंजीनियर, व्यावसायी और मेडिकल डॉक्टर थे। उन्होंने 19 दिसम्बर 1974 को अलटेर 8800 नामक कम्प्यूटर रिलीज किया।
उनका कम्प्यूटर लोगों के बीच ऐसा प्रसिद्ध हुआ कि एक साल में इसके पांच हजार मॉडल बिक गए। यह कम्प्यूटर पहली बार एक किट के रूप में उपलब्ध हुआ था।

Greek Scholar Eratosthenes

फादर ऑफ ज्योग्राफी: सोचिये अगर भूगोल का ज्ञान ही नहीं होता तो हम क्या जान पाते कि अमेरिका किधर है या हमारे दक्षिण में कौन सा देश स्थित है। दुनिया को समझने के लिये भूगोल जैसे विषय का आविष्कार किया गया और प्राचीन ग्रीक स्कॉलर एराटोसथेनस को फादर ऑफ ज्योग्राफी कहा गया। वो पहले ऐसे शख्स थे, जिन्होंने ज्योग्राफी शब्द का पहली बार उपयोग किया था, जिसका ग्रीक में अर्थ था पृथ्वी के बारे में लिखना।

Hippocratic

फादर ऑफ मेडिसिन: बीमारियों से छुटकारा दिलाने वाली मेडिसन के जनक माने जाते हैं ग्रीस के हिप्पोक्रेटिक। हिप्पोक्रेटिक स्कूल ऑफ मेडिसिन की स्थापना भी उन्होंने ही की थी, जोकि उस वक्त के ग्रीस में मेडिसिन के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी परिवर्तन था।
बीमारियों के बारे में हिप्पोक्रेटिक का कहना था कि बीमारियां मुख्यत प्राकृतिक कारणों से भी होती हैं। उन्होंने बहुत-सी बीमारियों को लिपिबद्ध भी किया था।
Mahatma Gandhi


फादर ऑफ नेशन: फादर ऑफ नेशन एक ऐसी पदवी है, जो उस इंसान को दी जाती है जिसने अपना पूरा जीवन अपने देश के लिये न्योछावर किया हो।
यूं तो अलग-अलग देशों में फादर ऑफ नेशन उस देश के इतिहास में योगदान के हिसाब से अलग-अलग हैं।
भारत में फादर ऑफ नेशन की पदवी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को दी गई है। इसी तरह अमेरिका में फादर ऑफ नेशन जॉर्ज वाशिंगटन को कहा जाता है।
Herodotus


फादर ऑफ हिस्ट्री: इतिहास को लेकर होने वाली जिज्ञासाओं को क्रमबद्ध तरीके से शांत करने की कोशिश जिस शख्स ने की, वो थे फादर ऑफ हिस्ट्री
यानी हेरोडोटस। महान रोमन दार्शनिक मार्कस ट्यूलियस सिसेरो ने पहली बार यह कहा था कि हेरोडोटस ही मानव इतिहास के पहले ज्ञाता हैं। हेरोडोटस ने यूरोपियन इतिहास को पहली बार डाक्यूमेंटेड किया था। उन्होंने ग्रीक-पर्शियन युद्ध को सिलसिलेवार लिखा था।
Remand Tomlinson


फादर ऑफ ई-मेल: अब तो सारी बातें चाहे वो जिन्दगी से जुड़ी हों या फिर करियर से, सब ई-मेल के जरिए ही की जाती हैं। ई-मेल के प्रणोता माने जाते हैं अमेरिका के रेमंड टॉमलिन्सन। वर्ष 1971 में उन्होंने अरपानेट ई-मेल सिस्टम बनाया, जिससे पहली बार अरपानेट से कनेक्टेड ऐसे कम्प्यूटर पर मेल भेजा जा सकता था, जो किसी दूसरे मोहल्ले, शहर में हो। इससे पहले तक मेल दूसरे किसी कम्प्यूटर पर नहीं भेजा जा सकता था।
Dada Sahib



फादर ऑफ इंडियन सिनेमा: यूं तो भारत में सिनेमा का पदार्पण अंग्रेजों के आने के बाद हो गया था, लेकिन वो फिल्म्स खालिस अंग्रेजों के मनोरंजन के लिये होती थीं। भारतीय फिल्मों के पितामह माने जाते हैं दादा साहब फाल्के। उन्होंने सबसे पहले 1913 में पहली भारतीय फुल लेंथ फिल्म बनाई थी, राजा हरिश्चंद्र।
अपने करियर में उन्होंने 95 फिल्म्स और 26 शॉर्ट फिल्म्स का निर्माण किया था।
Geoffrey Choucer

फादर ऑफ इंग्लिश लिटरेचर: अगर बात करें अंग्रेजी साहित्य की तो इसके जनक माने जाते हैं ज्योफ्री चौसर। मध्य युगीन काल में वह अंग्रेजी के बहुत महान कवि माने जाते थे। चौसर को सिर्फ कवि ही नहीं बल्कि लेखक, दार्शनिक, अल्केमिस्ट, ज्योतिष शास्त्र के ज्ञाता आदि के रूप में भी जाना जाता है। वह एक ब्यूरोक्रेट और डिप्लोमेट भी रहे थे। उन्होंने द बुक ऑफ डचेज सहित कई किताबें लिखीं।
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Source – KalpatruExpress News Papper

अकबर जहांगीर का पिता-पुत्र प्रेम



पिता और पुत्र के बीच वात्सल्य जैसे रस ही नहीं बहते, एक और रसायन वहां स्नवित होने लगता है। वह होता है अहं का कटुरस। हालांकि, सम्बंधी होने से यह अहं बढ़कर अहंकार या दंभ में परिवर्तित नहीं होता, परंतु वे एक-दूसरे में प्रतिस्पर्धी को देखने लगते हैं।
यह कटुता अक्सर जीवन के आगे बढ़ने के साथ समाप्त हो जाती है। लेकिन अक्सर समय हमें गलतियों का एहसास भी करा देता है। अकबर और उनके पुत्र जहांगीर के बारे में एक प्रसंग की चर्चा यहां की जानी चाहिए।
जहांगीर जिन्हें सलीम के नाम से जाना जाता था, अकबर के प्रति विद्रोही हो गए थे। वह आगरा पर अधिकार चाहते थे। इलाहाबाद जाकर उन्होंने अपने को सम्राट घोषित कर दिया और अपने नाम के सोने-चांदी के सिक्के चला दिए। अकबर ने उनसे मिलना चाहा तो सलीम ने कहा- इस शर्त पर मिलेंगे कि साथ में सलीम की सत्तर हजार की सेना भी हो। अकबर ने इस शर्त से इनकार कर दिया। बाद में किसी वक्त सलीम अकबर के दरबार में आये तो अकबर ने व्यंग्य किया कि तुम्हारे पास सत्तर हजार की सेना भी थी तो तुम अकेले क्यों आए? फिर उन्होंने सलीम के प्रति वात्सल्य दिखाया, मगर सलीम दंडवत करने को हुए तो थप्पड़ लगा दिया। अकबर की मृत्यु के बहुत बाद लिखी अपनी आत्मकथा में जहांगीर ने अकबर की बेहद तारीफ की। जहांगीर ने लिखा, अपनी चाल-ढाल में अब्बा साधारण नहीं जान पड़ते थे, ऐसा लगता था कि खुदा का नूर ही सामने है। यही नहीं, रोजमर्रा के जीवन में भी जहांगीर अकबर को अक्सर याद करते थे। इतिहासकार लिखते हैं, एक बार जहांगीर के पास काबुल से अनार और बदख्शां से खरबूज आए। उन्हें खाते हुए जहांगीर ने पिता को याद किया उन्हें फलों का बहुत शौक था। ऐसे फल देखकर वे कितने खुश होते?
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पिता को दें कोई तोहफा



अन्य दिवसों की तरह ही फादर्स डे भी अपने पिता के प्रति प्रेम दर्शाने का बेहतर माध्यम है। जब से आपने होश संभाला, आपके हर सुख-दुख में पिता की भूमिका खास रही। फादर्स डे सबसे खास दिन है, अपने पिता को खुश करने का। यह दिन आप अपने पिता के नाम कर इसे यादगार बना सकते हैं। इस दिन आप अपने पापा को कोई सुंदर उपहार देने के साथ ही अपना खास वक्त उनके साथ बिताकर बचपन की यादों को ताजा करेंगे तो स्वाभाविक है, ये लम्हे आपके लिये यादगार साबित होंगे।
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पिता: मजबूत दरख्त सा साथ



पिता अर्थात वह बड़ा छायादार वृक्ष, जिसमें बचपने की गौरेया बनाती है घोंसला..। पिता अर्थात वह उंगली, जिसे पकड़कर अपने पांव पर खड़ा होना सीखता है, घुटनों के बल चलने वाला..। पिता अर्थात वह कंधा, जिस पर बैठकर शहर की गलियों से दोस्ती करता है नन्हा मुसाफिर..। पिता अर्थात एक जोड़ी वह आंखें, जिनकी पलकों में अंकुरते हैं बच्चे को हर तरह से बड़ा करने के हजारों सपने..। पिता अर्थात वह पीठ, जो बेटे को घुड़सवारी करवाने के लिये तैयार रहती है हरदम..। पिता अर्थात वह लाठी, जो छोटे पौधे को सीधा करने के लिये खड़ी और गड़ी रहती है साथ-साथ..। पिता अर्थात हाड़-मांस की वह काया, जिसमें पलता है बच्चों का दुलार-संस्कार..। प्रस्तुत है हर पिता को समर्पित फादर्स डे का हमारा विशेषांक:
पिताशब्द सुनकर एक ऐसे व्यक्ति की छवि उभर कर आती है, जो सख्त है, खुद से दूर रखता है, फिर भी दिल के सबसे करीब होता है। कहते हैं कि पिता वह वृक्ष है जिसकी छाया तले नन्हें पौधे पलते हैं। आजकल पिता की पारम्परिक छवि बदली है।
अब पिता वह नहीं रह गए हैं, जिनके आते ही बच्चे अपनेअ पने कमरों में घुस जाते थे, उनसे बात करने में घबराते थे, बल्कि अब पिता से अच्छा दोस्त बाहर की दुनिया में मिलना मुश्किल लगता है।
पिता और बच्चों का रिश्ता निभाने की तकनीक अब पहले से काफी अलग है। उनके बीच बचपन में स्नेह का और युवावस्था में दोस्ती का रिश्ता होता है।
बुढ़ापे में रोल बदल जाता है। यानी पिता बच्चों जैसे हो जाते हैं और बच्चे पिता की अपने बच्चे जैसी परवाह समझने लगते हैं। एक और दिलचस्प-सी बात होती है। मध्यवय का होतेहो ते अक्सर व्यक्ति चाहे-अनचाहे अपने पिता की तरह होने लगता है। पिता की अच्छाइयां तो ठीक, कई बार उसमें ऐसे गुण भी परिलक्षित होने लगते हैं, जिन्हें वह अपने पिता में नापसंद करता रहा हो। उसके हाव-भाव, आदतें, शरीर की मुद्रा आदि भी जानने वालों को उसके पिता की याद दिलाने लगती है।
             एक पिता के कई रूप
समय के साथ बदलते हुए पापा-
 पिता अब अपने बच्चों के साथ ज्यादा खुलकर मिलते हैं। इस रिश्ते में अब वह ङिाझक नहीं रह गई है जो पहले हुआ करती थी। आज के बच्चे अपने पिता को हर उस वक्त अपने साथ खड़ा पाते हैं, जब उनकी हिम्मत जवाब देने लगती है।
पिता अपने बच्चों के डिसिप्लिन इंचार्ज नहीं होते। आज के वक्त में किसी भी बच्चे को अपने पापा का नाम हिटलर या इमरजेंसी रखने की जरूरत नहीं पड़ती, बल्कि, पापा तो मस्ती के वक्त के साथी बन जाते हैं। बच्चे अपने सीक्रेट्स और शैतानियां अब अपने पापा से शेयर करने में डरते नहीं हैं। पापा उनकी शैतानी में पार्टनर बनते हैं, उनके साथ खेलते हैं, मस्ती करते हैं यानी कुल मिलाकर उन्हें पूरा इंसान बनाते हैं और खुद भी सीखते हैं। पापा की दुश्वारियां भी वक्त के साथ बढ़ी हैं।
प्रतिस्पर्धा बढ़ी है, काम बढ़ गया है, लेकिन इन सब के बीच भी कभी वह बच्चों को नहीं भूलते। हां, समय देने का तरीका जरूर बदल गया है। अब पापा भी फेसबुक और वॉट्स-एप के जरिए बच्चों से जुड़े रहते हैं।
पापा और बच्चों के रिश्ते का स्वरूप जरूर बदला है, लेकिन जज्बात आज भी वही हैं।
बच्चों के हीरो पिता-
 एक शोध के मुताबिक, आज भी दुनिया भर में बच्चे सर्वप्रथम आदर्श के रूप में अपने पिता को ही देखते हैं। मां उनकी पहली पाठशाला है तो पिता पहला आदर्श। वे अपने पिता से ही सीखते हैं और उनके जैसा ही बनना चाहते हैं। इसलिये जीवन में जितना मां का महत्त्व होता है, उतना ही पिता का भी है। हम सभी को बचपन में अनुशासनप्रियता व सख्ती के चलते पिता भले क्रूर नजर आते हैं, लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है और हम जीवन की कठिन डगर पर चलने की तैयारी करने हैं, हमें अनुभव होता है कि पिता की वह डांट और सख्ती हमारे भले के लिये ही थी। उनकी हर एक सीख जब हमें अपनी मंजिल की ओर बढ़ने में मदद करती है, तब हमें मालूम पड़ता है कि पिता हमारे लिए कितने खास थे, और हैं।
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